*कवितायें*

*जय सीया+राम !*

> यह कविता * मधुर कविता   किसी धर्म विशेष के भगवान की महिमा-मण्डन के लिये नहीं लिखी गई है, बल्कि नाम भले ही उनके प्रय…

*मर्मस्पर्शी-कवितायें !*

मर्मस्पर्शी-कवितायें ! हे दोस्त जरा तू मेरी सुन!     हे दोस्त जरा तू मेरी सुन    जीवन आखिर क्या है इस पर मेरी धुन, …

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