*Tribes of india के बारे में सबसे सटीक और संक्षिप्त जानकारी!*

 

Tribes of india

Tribes of india के बारे में सबसे सटीक और संक्षिप्त जानकारी!

Tribes of india का अर्थ होता है "जनसामूहिक जीवन के लिए एक समूह"। इस शब्द का उपयोग भारतीय उपमहाद्वीप में जनजातियों के बारे में बात करते हुए किया जाता है। जनजातियाँ भारत के विभिन्न हिस्सों में पाई जाती हैं, जैसे कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम आदि। ये सभी जनजातियां अपनी-अपनी संस्कृति, भाषा, लोक गीत, नृत्य आदि के लिए जानी जाती हैं।


भारत में जनजातियों की संख्या लगभग 10 करोड़ है। इनमें से कुछ प्रमुख जनजातियां गोंड, संथाल, मुंडा, भिल, ओरान, सन्थाल, नागा, बोड़ो, मिजो, कोंकण, गारो, निषाद, आदिवासी गोंड आदि हैं। ये सभी जनजातियां अपनी-अपनी विशेषताओं के लिए जानी जाती हैं।


भारत के अनेक राज्यों में जनजातियों की आरक्षण सम्बन्धी विभिन्न नीतियां हैं। इन नीतियों के तहत जनजातियों को सरकारी नौकरियों और  शिक्षा आदि की  व्यवस्था की जाती है। 


 जनजाति कितने प्रकार के होते हैं ?

जनजाति भारत में अनेक प्रकार की होती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

गिरिजन: यह जनजाति हिमालय के शीर्षों और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। इनकी जीवन शैली मुख्य रूप से खेती और चरवाही पर आधारित होती है। इनकी संस्कृति व धर्म अलग-अलग होती है।


आदिवासी: भारत के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी जनजातियां पाई जाती हैं। इनका मुख्य जीवन आधार जंगली और पर्वतीय क्षेत्रों में होता है। इनकी संस्कृति, भाषा और धर्म भी विभिन्न होते हैं।


सवर्ण: ये जनजातियां भारत में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा आदि राज्यों में पाई जाती हैं। इनकी मुख्य आय रोजगार, बिजनेस और कृषि पर आधारित होती है। इनकी संस्कृति, भाषा और धर्म भी विभिन्न होते हैं।

निषाद: भारत में निषाद जनजाति उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा आदि राज्यों में पाई जाती है। 

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 भारत में कुल कितने जनजाति हैं ?

भारत में अनेक जातियां हैं जो अपनी-अपनी विशेषताओं के आधार पर विभाजित होती हैं। भारत के संविधान के अनुसार जनजाति भारत के सामान्य जनता से अलग होती है और इन्हें आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विशेषाधिकार प्रदान किए जाते हैं।


भारत में कुल 705 जनजातियां हैं। इनमें से 75 जनजातियां भारत के उत्तरी राज्यों में पाई जाती हैं, 52 दक्षिणी राज्यों में, 43 पश्चिमी राज्यों में और 10 उत्तर पूर्वी राज्यों में होती हैं। इन जनजातियों की आबादी कुल भारतीय जनसँख्या का लगभग 8.6 प्रतिशत होता है।


भारत में जनजातियों की संख्या राज्यों और क्षेत्रों के अनुसार भिन्न होती है। उत्तर प्रदेश में 75 जनजातियां हैं जो कि सबसे ज्यादा हैं। मध्य प्रदेश में 46 जनजातियां हैं और बिहार में 42 जनजातियां हैं। असम में 29 जनजातियां हैं जो कि बहुत से लोगों के लिए अभी भी एक आश्चर्य का विषय है।

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भारत का सबसे बड़ा जनजाति कौन सा है ?

भारत में कई बड़ी जनजातियां हैं जो विभिन्न भागों में बसती हैं। लेकिन भारत की सबसे बड़ी जनजाति है 'गोंड' जो कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना राज्यों में बसती है।


गोंड जनजाति की आबादी लगभग 12 मिलियन है और यह भारत की सबसे बड़ी जनजाति होने के साथ-साथ भारत की सबसे उन्नत जनजाति भी है। इस जनजाति की भाषा गोंडी होती है जो भारत की आठवीं अनुसूचित भाषाओं में से एक है।


गोंड जनजाति की जीवन शैली विविधता से भरी होती है जो संसार के किसी भी देश या क्षेत्र से मिलती जुलती नहीं है। इनकी परंपरागत जीवन शैली और उनकी संस्कृति के विषय में अधिकतर जानकारी लोगों के लिए अभी भी अनजान है। ये अपने रंगबिरंगे उत्सवों और उत्साहपूर्ण नृत्यों के लिए भी जाने जाते हैं। गोंड जनजाति का जीवन आधार वनों से होता है। 


 भारत की प्रमुख जनजाति कौन सी है ?

Tribes of india में कई प्रमुख जनजातियां हैं जो अपनी विशेषताओं और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रमुख जनजातियों में से कुछ निम्नलिखित हैं:-


गोंड: गोंड जनजाति भारत की सबसे बड़ी जनजाति है जो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना राज्यों में बसती है।


संताल: संताल जनजाति झारखंड, ओडिशा, बंगाल, बिहार और चातीसगढ़ में बसती है। यह जनजाति अपनी भाषा, संस्कृति, गीत और नृत्य के लिए प्रसिद्ध है।


भील: भील जनजाति राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बसती है। यह जनजाति भारत की सबसे पुरानी और संस्कृतिक जनजाति है।


मुंडा: मुंडा जनजाति झारखंड, ओडिशा, बंगाल, बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड में बसती है। यह जनजाति अपनी अलग भाषा, संस्कृति, गाने और नृत्यों के लिए प्रसिद्ध है।


 भारत की सबसे खूंखार जनजाति कौन सी है ?

भारत की सभी जनजातियों में कोई खुंखार जनजाति नहीं होती है। सभी जनजातियों के अपने-अपने संस्कृति और विशेषताएं होती हैं जिनके बारे में जानना बेहद महत्वपूर्ण होता है।


यदि आप खुंखार शब्द का अर्थ पूछ रहे हैं, तो यह ज्यादातर आतंकवादियों या आपत्तिजनक संगठनों के लिए प्रयोग किया जाता है। ऐसे संगठन भारत में कानूनी रूप से प्रतिबंधित होते हैं और संविधान के तहत दण्डनीय अपराध के रूप में मान्य होते हैं।


भारत में आतंकवाद की कुछ संगठन हैं जो अपनी क्रियाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन यह संगठन भारत की विविध जनजातियों से सम्बन्धित नहीं होते हैं और इसलिए ऐसे संगठनों को जनजाति के नाम से जोड़ना सही नहीं होगा।


भारत की जनजातियों में से हर जनजाति अपनी संस्कृति, अनुभव और विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए, हमें सभी जनजातियों को समझना और सम्मान देना चाहिए।


 भारत की सबसे सभ्य जनजाति कौन सी है ?

भारत की सभी जनजातियों में से कोई एक जनजाति सबसे सभ्य होने का दावा नहीं कर सकती। सभी जनजातियों के अपने अपने संस्कृति, धर्म, भाषा, शैली, और विशेषताओं होती हैं जो उन्हें अनूठा बनाते हैं।


लेकिन अगर हम सभी जनजातियों को इन विशेषताओं के आधार पर विश्लेषण करें, तो कुछ जनजातियां सबसे सभ्य या विकसित मानी जा सकती हैं।


भारत में विभिन्न जनजातियां जैसे कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, जैन, सिख, मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध, ट्राइबल, आदि हैं। हालांकि, यदि हम सभी जनजातियों को सबसे सभ्य जनजाति के आधार पर विश्लेषण करें, तो वह जनजाति होगी जो धार्मिक और सामाजिक तौर पर विकसित है।


भारत की सबसे सभ्य जनजाति का नाम 'ब्राह्मण' होता है। ब्राह्मण जनजाति धार्मिक रूप से प्रतिष्ठित है और वेदों के अनुसार बनी है।


   भारत में जनजातियों की स्थिति 

Tribes of india की स्थिति विभिन्न तत्वों पर निर्भर करती है। इन तत्वों में से कुछ निम्नलिखित हैं:


समाज: भारत में समाज विभिन्न जातियों और धर्मों से मिलकर बना हुआ है। यह समाज उन जनजातियों के अधीन होता है जो शक्तिशाली होती हैं और सामाजिक अधिकारों का आनंद उठाती हैं।


शिक्षा: शिक्षा जनजातियों की स्थिति पर असर डालती है। जनजातियों में अधिकांशतः अनपढ़ होते हैं जो उन्हें समाज के अन्य वर्गों से पीछे कर देता है। शिक्षा की कमी से उन्हें विभिन्न समस्याओं से भी जूझना पड़ता है।


सरकारी नीतियां: सरकार की नीतियां भी जनजातियों की स्थिति पर असर डालती हैं। उन्हें सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक अधिकारों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।


धर्म: धर्म भी जनजातियों की स्थिति पर असर डालता है। भारत में धर्म जनजातियों के विभाजन का मुख्य कारण है।


अत: भारत में जनजातियों की स्थिति बहुत ही विचारणीय है !

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