*जानें भविष्य मालिका बुक की सच्चाई! (Bhavishya malika book)*

भविष्य मालिका बुक 


जानें भविष्य मालिका बुक की सच्चाई! (Bhavishya malika book)

आज के इस लेख में हम इस समय सबसे अधिक चर्चित पुस्तक "भविष्य मालिका" के बारे में जानेंगे। हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि इस पुस्तक की सच्चाई क्या है और यह पुस्तक मानवता के लिए कितनी उपयोगी है ? क्या भविष्यवाणी की यह पुस्तक हमारे प्राचीन ग्रंथों का हिस्सा है?, और क्या इसकी कोई प्रमाणिकता भी है ? आइये सविस्तार से भविष्य मालिका की पुस्तक के बारे में जानते हैं :-

  भविष्य मालिका क्या है ?

भविष्य मालिका एक प्रकार की ज्योतिषीय ग्रंथ है जो भविष्य की भविष्यवाणी और भविष्य की घटनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह एक प्राचीन ग्रंथ है जो भारतीय ज्योतिषीय परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भविष्य मालिका शब्द का अर्थ होता है "भविष्य की माला" या "भविष्यवाणी की सूची"। यह ग्रंथ भविष्य की भविष्यवाणी करने के लिए विभिन्न ज्योतिषीय तकनीकों, योगों, राशियों, ग्रहों और नक्षत्रों का उपयोग करता है।


भविष्य मालिका का अनुसरण करना ज्योतिषियों और भविष्यवक्ताओं के लिए एक प्राचीन तरीका रहा है जिन्हें माना जाता था कि वे भविष्य की घटनाओं को देख सकते हैं और उन्हें भविष्यवाणी कर सकते हैं। भविष्य मालिका में विभिन्न राशियों, ग्रहों और नक्षत्रों के स्थितियों के आधार पर व्यक्ति के भविष्य के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा, यह भी बताया जाता है कि व्यक्ति के जीवन में किसी विशेष योग का आने से किसी विशेष समय पर क्या घटनाएं हो सकती हैं।


भविष्य मालिका में उपयोग किए जाने वाले ज्योतिषीय तकनीकों में नक्षत्र दृष्टि, ग्रहों की स्थिति, राशि दृष्टि, योग, राजयोग, धनयोग, विदेश यात्रा योग, विवाह योग, संतान योग, संबंध योग, रोग योग, विदेश योग और भविष्यवाणी योग शामिल होते हैं। ये तकनीकें ज्योतिषीय चक्र (हॉरोस्कोप) के भिन्न-भिन्न स्थानों पर स्थित ग्रहों और नक्षत्रों के आधार पर व्यक्ति के भविष्यवाणी करने में मदद करती हैं।


भविष्य मालिका के उपयोग से ज्योतिषीय विद्या का विकास हुआ और भविष्यवाणी का एक समृद्ध विधायक विज्ञान बना। इसे विशेष ध्यान से पढ़ने और समझने के लिए व्यक्ति को अधिक से अधिक ज्ञान का संचय करना पड़ता है। भविष्य मालिका में दी गई भविष्यवाणी का विश्वास करने वाले लोग अपने भविष्य के बारे में अधिक से अधिक जानने की कोशिश करते हैं और विभिन्न ज्योतिषीय उपायों का आधार बनाकर अपने भविष्य को सुख-दुख से सम्बोधित करने का प्रयास करते हैं।


आज के वैज्ञानिक युग में भी भविष्य मालिका के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यह ज्योतिष शास्त्र का एक प्रमुख अंग है जो लोगों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए, भविष्य मालिका का अध्ययन और समझना मान्यता से किया जाना चाहिए, लेकिन इसे अन्य विज्ञानों के साथ समंजस्य बनाना भी महत्वपूर्ण है। इस तरह ज्योतिष शास्त्र और भविष्य मालिका के माध्यम से मनुष्य अपने भविष्य को अधिक से अधिक सकारात्मक बना सकता है और अपने जीवन को सफलता की ओर अग्रसर कर सकता है।


  क्या भविष्यमालिका की पुस्तक वेदों का हिस्सा है?

भविष्य मालिका की पुस्तक वेदों का हिस्सा नहीं है। भविष्य मालिका और वेद दोनों अलग-अलग ज्योतिषीय ग्रंथ हैं, जिनका महत्व भारतीय संस्कृति में अपार है। हालांकि, इन दोनों के बीच कुछ संबंध हो सकते हैं, क्योंकि भविष्य मालिका भविष्य की भविष्यवाणी के लिए एक ज्योतिषीय ग्रंथ है जबकि वेद भारतीय धर्म, संस्कृति और ज्ञान के मौलिक स्रोत हैं।


वेद भारतीय संस्कृति के चार प्रमुख ग्रंथ हैं - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, और अथर्ववेद। इनमें से प्रत्येक वेद में विभिन्न सूक्त, मंत्र, और उपासना-संबंधी ज्ञान होता है, जिसे ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषदों में विस्तार से व्याख्या किया गया है। वेदों में ज्ञान, विज्ञान, समृद्धि, आयुर्वेद, ज्योतिष, समाज, धर्म, और यज्ञ-यागादि के विधियों का वर्णन है।


भविष्य मालिका एक अन्य ज्योतिषीय ग्रंथ है जो वेदों के उपांग समझा जाता है। इसमें विभिन्न ज्योतिषीय तकनीकों, योगों, राशियों, ग्रहों और नक्षत्रों का उपयोग करके व्यक्ति के भविष्य की भविष्यवाणी की जाती है। भविष्य मालिका उपास्य देवी-देवताओं, ग्रहों और नक्षत्रों के अधीन होने वाली योगिक प्रक्रियाओं पर आधारित होती है। इसे ध्यान से पढ़कर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य के भविष्य के बारे में ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।


वेदों और भविष्य मालिका जैसे ज्योतिषीय ग्रंथों का उद्दीपन वैदिक संस्कृति में हुआ था। वेदों में ग्रह-नक्षत्रों की व्याख्या और ज्योतिषीय तत्वों का उल्लेख है, जिसका प्रभाव भविष्य मालिका में देखा जा सकता है। वेदों में नक्षत्रों के स्थान, चाल, ग्रहों के प्रभाव, राशियों के स्वभाव और विभिन्न योगों का वर्णन मिलता है, जो भविष्य मालिका में भी उपयोगी ज्ञान के रूप में उपलब्ध है।


इसलिए, वेद और भविष्य मालिका दोनों ही महत्वपूर्ण ज्योतिषीय ग्रंथ हैं जो भारतीय संस्कृति में अपना विशेष स्थान रखते हैं। वेदों के ज्ञान के आधार पर ही भविष्य मालिका में ज्योतिषीय ज्ञान का विस्तार हुआ और इसे विज्ञान की नजर से देखा जाने लगा। यह दोनों ग्रंथ भारतीय ज्ञान और संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर हैं, जिन्हें समझने और समर्थन करने के लिए हमें इनके महत्व को समझना और सम्मान करना चाहिए।

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  भविष्य मालिका की पुस्तक कब और किसने लिखी थी?

"भविष्य मालिका" की पुस्तक के रचयिता के विषय में निश्चितता नहीं है। भविष्य मालिका एक प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथ है जिसका संबंध भारतीय ज्योतिषीय परंपराओं से है। इसमें भविष्य की भविष्यवाणी और ज्योतिषीय विधियों का वर्णन है। इसके लिए विभिन्न ज्योतिषीय तकनीकों, राशियों, ग्रहों, नक्षत्रों और योगों का उपयोग किया जाता है। यह ग्रंथ भविष्य की घटनाओं के बारे में ज्ञान प्रदान करने का कार्य करता है।


"भविष्य मालिका" के रचना काल के बारे में निश्चित जानकारी नहीं है, क्योंकि इसके अधिकांश प्रतिलेखन अत्यंत प्राचीन समय से लोप हो गया है। इसका अधिकांश ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखा गया है जो समय के साथ ही अल्पावधि में लुप्त हो गये हैं। भारतीय ज्योतिषीय परंपराओं में भविष्य मालिका को महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है और कई ज्योतिषीय विद्वान इस पर अध्ययन करते हैं।


भारतीय ज्योतिषीय परंपराओं में भविष्य मालिका को लोगों के भविष्य की भविष्यवाणी करने के लिए एक मार्गदर्शक साहसिक ग्रंथ माना जाता है। यह ग्रंथ भविष्य की उचित तथ्यवादी भविष्यवाणी के लिए उपयुक्त ज्योतिषीय तकनीकों का विस्तार करता है। इसमें व्यक्ति के जन्म की राशि, नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति और दशा-भुक्तियों के आधार पर भविष्य की भविष्यवाणी की जाती है।


भविष्य मालिका जैसे ज्योतिषीय ग्रंथों का उद्दीपन वेदों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में हुआ था। वेदों में ग्रह-नक्षत्रों की व्याख्या और ज्योतिषीय तत्वों का उल्लेख है, जिसका प्रभाव भविष्य मालिका में देखा जा सकता है। वेदों में ज्ञान, विज्ञान, समृद्धि, आयुर्वेद, ज्योतिष, समाज, धर्म, और यज्ञ-यागादि के विधियों का वर्णन है, जिससे भविष्य मालिका में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य के भविष्य की भविष्यवाणी की जाती है।


समय के साथ ज्योतिष शास्त्र में विकास हुआ और भविष्य मालिका जैसे ग्रंथों का उद्दीपन हुआ। यह ग्रंथ ज्योतिषीय विज्ञान की महत्वपूर्ण स्रोत बना और लोगों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले ज्योतिषीय उपायों का विस्तार किया। इसलिए, भविष्य मालिका जैसे ज्योतिषीय ग्रंथ हमारे भारतीय संस्कृति के मौलिक संसाधनों में से एक हैं, जिन्हें हमें समझने और समर्थन करने का प्रयास करना चाहिए।


 क्या संत अच्चयुतानन्द दास जी ने भविष्य मालिका की पुस्तक लिखी थी?

नहीं, संत अच्युतानंद दास जी ने "भविष्य मालिका" नामक कोई पुस्तक नहीं लिखी है। "भविष्य मालिका" एक ज्योतिषीय ग्रंथ है जो भविष्य की भविष्यवाणी करने के लिए उपयोगी ज्ञान प्रदान करता है और भारतीय ज्योतिषीय परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह ग्रंथ भविष्यवाणी के लिए विभिन्न ज्योतिषीय तकनीकों, राशियों, ग्रहों, नक्षत्रों और योगों का उपयोग करते हुए भविष्य की पूर्वानुमान बनाने में मदद करता है।


संत अच्युतानंद दास जी भारतीय भक्तिसंत थे जो अपने भक्तिभाव से प्रसिद्ध थे। उनके जीवन का उद्दीपन वेद, पुराण, रामायण, महाभारत, भगवद गीता, और अन्य धार्मिक ग्रंथों से मिला था। उनकी भक्ति और ध्यान की प्रक्रिया बहुत गहरी थी और उन्हें भगवान के प्रेम का अनुभव स्पष्ट रूप से होता था। उन्हें भगवान के दर्शन का अनुभव अपने जीवन के अंतिम दिन तक स्थायी रूप से बना रहता था। उनकी भक्ति और प्रेम के प्रती लोगों में विशेष आकर्षण था और उनके संबंधीय गाँव और नगर के लोग उन्हें अपना आदर्श मानते थे।


संत अच्युतानंद दास जी के जीवन एक सच्चे भक्त, साधक और सेवक के रूप में उत्कृष्ट उदाहरण था, जो भगवान के प्रेम में रत थे और संसार के भीतर सत्य की खोज में लगे रहते थे। उन्होंने अपने जीवन को धर्म, सेवा, और भक्ति में समर्पित किया और अपने शिष्यों और भक्तों को भगवान के प्रेम और सेवा में लगे रहने का प्रेरणा दिया।


इसलिए, संत अच्युतानंद दास जी ने "भविष्य मालिका" नामक कोई ज्योतिषीय ग्रंथ नहीं लिखी थी। उनका जीवन भक्ति और सेवा में समर्पित था और उन्होंने धार्मिक उपदेश देने के लिए अपनी भक्ति गीत और संदेश दिए थे, जो लोगों को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरित करते थे।


  भविष्य मालिका की पुस्तक में भविष्य के बारे में क्या-क्या लिखा है?

"भविष्य मालिका" पुस्तक एक ज्योतिषीय ग्रंथ है जो भविष्य की भविष्यवाणी करने के लिए उपयुक्त ज्ञान प्रदान करता है। यह ग्रंथ भारतीय ज्योतिषीय परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और विभिन्न ज्योतिषीय तकनीकों, राशियों, ग्रहों, नक्षत्रों, और योगों का उपयोग करके भविष्य की पूर्वानुमान बनाने में मदद करता है।


यह ग्रंथ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भविष्य की भविष्यवाणी करने की विधि और तकनीकों का विवरण करता है। इसमें व्यक्ति के जन्म के समय और स्थान के आधार पर ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, राशि और योगों के अनुसार उनके भविष्य में होने वाले घटनाओं की भविष्यवाणी की जाती है। इस ग्रंथ में भविष्य के कई पहलुओं को देखते हुए उपयुक्त ज्योतिषीय उपाय और उपायों के विवरण भी मिलते हैं जो व्यक्ति के जीवन को सुख-शांति और समृद्धि की दिशा में बदलने में सहायक होते हैं।


इस पुस्तक में निम्नलिखित कुछ मुख्य विषयों पर चर्चा की जाती है:-


1. ग्रहों की चाल: भविष्य मालिका में ग्रहों की चाल, गति और उनके आश्रय स्थानों का विवरण होता है। इससे भविष्य में ग्रहों के अशुभ स्थितियों का प्रभाव और उनसे उपाय करने की आवश्यकता का पता चलता है।


2. राशियाँ और नक्षत्र: भविष्य मालिका में बारह राशियों और नक्षत्रों के विवरण से भविष्यवाणी की जाती है। व्यक्ति के जन्म के समय राशि और नक्षत्र के आधार पर उनके व्यक्तित्व और भविष्य में होने वाले घटनाओं का अंकगणित किया जाता है।


3. योग और दशाएं: ग्रहों के योग और दशाएं भविष्य मालिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनसे व्यक्ति के जीवन में आने वाली समस्याओं के लिए उपाय करने की जानकारी मिलती है।


4. उपाय: भविष्य मालिका में भविष्यवाणी के अनुसार उपाय करने के विवरण होते हैं। इन उपायों का उपयोग करके व्यक्ति अशुभ समय में भविष्य में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए प्रयास कर सकते हैं।


5. समरसता के मार्ग: भविष्य मालिका में धर्म, नैतिकता और समरसता के मार्ग पर भी चर्चा होती है। यहां व्यक्ति को अपने जीवन में सफलता और शांति के लिए सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है।


"भविष्य मालिका" एक ज्योतिषीय ग्रंथ होने के कारण इसमें भविष्यवाणी के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है, और इसके उपयोग से व्यक्ति अपने भविष्य के बारे में जान सकता है। यह ग्रंथ ज्योतिषीय विज्ञान की महत्वपूर्ण स्रोत है जिसका उपयोग लोग अपने जीवन में समस्याओं का समाधान करने और समृद्धि की प्राप्ति के लिए करते हैं। यह ग्रंथ ज्योतिषीय शास्त्र के अनुसार विश्वास करने वालों के लिए भविष्य में होने वाले घटनाओं के लिए एक मार्गदर्शक साधन है।


क्या हमें भविष्य मालिका की पुस्तक पर विश्वास करना चाहिए? 

भविष्य मालिका एक ज्योतिषीय ग्रंथ है जिसमें भविष्यवाणी के लिए विभिन्न ज्योतिषीय तकनीकों का उपयोग किया जाता है। यह ग्रंथ भारतीय ज्योतिषीय परंपराओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और लोग इसे अपने भविष्य के बारे में जानने के लिए पढ़ते हैं। हालांकि, भविष्य मालिका की पुस्तक पर विश्वास करना या नहीं करना व्यक्ति की विचारधारा, धार्मिक आदर्शों, और विज्ञान पर निर्भर करता है।


ज्योतिष शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है जो ग्रहों, नक्षत्रों, राशियों, और योगों के आधार पर व्यक्ति के जन्म के समय और स्थान के अनुसार उनके भविष्य में होने वाले घटनाओं की भविष्यवाणी करता है। भविष्य मालिका भी इसी शाखा का एक प्रसिद्ध ग्रंथ है जो भविष्यवाणियों के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग करता है। हालांकि, ज्योतिष विज्ञान एक अनुमानात्मक विज्ञान है और इसमें किसी भी भविष्यवाणी की पूर्वानुमानित सत्यता का पूरा विश्वास नहीं होता है।


भविष्य मालिका और ज्योतिष विज्ञान के पक्ष और विपक्ष:

भविष्य मालिका और ज्योतिष विज्ञान के पक्ष में रहने वाले व्यक्ति इसे एक विश्वसनीय और प्रामाणिक विज्ञान मानते हैं जो भविष्य में होने वाली घटनाओं को भविष्यवाणी कर सकता है। वे इसे अपने जीवन की दिक्कतों का समाधान करने और सफलता के मार्ग में मदद करने के लिए एक मार्गदर्शक साधन मानते हैं। उनका मानना है कि ज्योतिष विज्ञान द्वारा हम अपने जीवन को सकारात्मक बना सकते हैं और अनिश्चयवाद से बच सकते हैं।


विपक्ष में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष विज्ञान को एक अनुमानात्मक विज्ञान मानते हैं जिसमें भविष्यवाणियों की सटीकता के संदिग्ध होते हैं। उनका मानना है कि ग्रहों और नक्षत्रों की चाल समय से बदलती रहती है और यह सिर्फ व्यक्ति के जन्म के समय पर ही नहीं निर्धारित करती है। इसलिए, भविष्यवाणियों के आधार पर निश्चित रूप से किसी भी घटना को पूर्वानुमानित करना संभव नहीं होता है।


ज्योतिष विज्ञान की सटीकता पर प्रश्न:

ज्योतिष विज्ञान के पक्ष में रहने वाले विश्वास करते हैं कि यदि ज्योतिष विज्ञान के नियमों का ध्यान सही ढंग से रखा जाए और समय-समय पर उचित विधि से उपाय किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने में मदद मिल सकती है। वे इसे एक विज्ञान मानते हैं जिसमें निश्चित मापदंड और नियमों का पालन करते हुए भविष्यवाणी की जा सकती है।


ज्योतिष विज्ञान के विपक्षी विश्वास करते हैं कि इसमें सटीकता नहीं होती है और यह व्यक्ति को भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में सही जानकारी नहीं देता है। उन्हें यह भी चिंता है कि ज्योतिष विज्ञान द्वारा भविष्यवाणी की गई घटनाएं जीवन को नकारात्मक बना सकती हैं और व्यक्ति को अनिश्चयवाद में डाल सकती हैं।


भविष्य मालिका पर विश्वास करने का फैसला व्यक्ति के हाथ में होता है। ज्योतिष विज्ञान एक अनुमानात्मक विज्ञान है, जिसमें किसी भी भविष्यवाणी की पूर्वानुमानित सत्यता का पूरा विश्वास नहीं होता है। हमें समझना चाहिए कि भविष्यवाणियों के आधार पर सभी निर्णय लेने से पहले हमें सतर्क रहने की आवश्यकता होती है और उन्हें एक दिशा में अनुसरण करने के लिए अपने स्वयं के विचारों, अनुभवों, और कर्मों पर विश्वास करना चाहिए। हमें भविष्य को सकारात्मक बनाने के लिए अपने संघर्षों पर ध्यान देना चाहिए और सफलता की प्राप्ति के लिए प्रत्याशा और परिश्रम का साथ देना चाहिए। भविष्य मालिका को विश्वास करने या नहीं करने में एक स्वतंत्र व्यक्तिगत निर्णय है और यह व्यक्ति की विचारधारा और धार्मिक आदर्शों पर भी निर्भर करता है।

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