*विवाह अपराध से संबंधित धाराएं ! (जानिये विस्तार से। )*

 

विवाह अपराध क़ानून !

विवाह अपराध से संबंधित धाराएं ! (जानिये विस्तार से। )

    पति-पत्नी के बीच का रिश्ता विश्वास, समर्पण और प्रेम का होता है। फिर भी इंसानी जीवन में वासनाओं और अभिलाषाओं के चलते विवाहित जीवन में भी अपराध से संबंधित घटनाएँ घटित हो जाती हैं। हमारे देश में विवाह से संबंधित अपराधों के विरुद्ध कानून का वर्णन सविस्तार किया गया है।

  भारतीय दण्ड सहिंता 1860 के अध्याय 20 की धारा 493 से लेकर 498 तक में विवाह से संबंधित अपराधों का वर्णन किया गया है, जिनके कारण और समाधान इस प्रकार से दिये गये हैं :-

  धारा 493 विधिपूर्ण विवाह के कपटपूर्ण विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा किया गया सहवास !

  हर पुरुष, जो किसी स्त्री को, जो विधिपूर्वक यानि कि कानूनी रूप से उससे विवाहित न हो, छल करके यह विश्वास दिलाएगा कि वह कानूनीरूप से उससे विवाहित है और इस विश्वास में उस स्त्री का अपने साथ सहवास या मैथुन (Sex) करेगा,वह दोनों में से किसी भान्ति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जायेगा और अर्थदंड से भी दंडनीय होगा।

 धारा 494 पति या पत्नी के जीवनकाल में पुन: विवाह करना !

  जो कोई पति या पत्नी के जीवित होते हुये किसी ऐसी दशा में विवाह करेगा जिसमें ऐसा विवाह इस कारण शून्य है कि वह ऐसे पति या पत्नी के जीवन-काल में होता है, तो वह दोनों में से किसी भान्ति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकेगी, दंडित किया जायेगा और अर्थदंड से भी दंडनीय होगा।

  *लेकिन यह बात ऐसे पति या पत्नी पर लागू नहीं होती जो अपने सगे-संबंधियों के साक्ष्यों के मुताबिक या समाज की गवाही के मुताबिक या कहीं थाना चौकी की रिपोर्ट के मुताबिक अपने पति या पत्नी के संग सात-वर्ष तक न देखा गया हो और न ही सुना गया हो। ऐसे व्यक्ति को कानून द्वारा सामाजिक रूप से मृत माना जाता है।*

 धारा 495 वही अपराध पूर्ववर्ती विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर, जिसके साथ बाद में विवाह किया जाता है !

  जो कोई पूर्ववर्ती अंतिम धारा में परिभाषित अपराध अपने पूर्व विवाह की बात उस व्यक्ति से छिपाकर करेगा, जिससे पश्चातवर्ती विवाह किया जाये, उसके दंड की अवधि दस वर्ष से भी अधिक बढ़ाई जा सकती है और साथ ही ऐसे व्यक्ति पर अर्थ दंड भी लागू किया जाता है। 

धारा 496 विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाहकर्म पूरा कर लेना !

  जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्ण आशय से विवाह अनुष्ठान होने का कर्म यह जानते हुये पूरा करेगा कि वह विधिपूर्वक विवाहित नहीं हुआ है; वह दोनों में से किसी भान्ति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकेगी, दंडित किया जायेगा और अर्थदंड से भी दंडनीय होगा।

 धारा 497 जारकर्म !

  जो कोई ऐसे व्यक्ति के साथ, जो कि किसी अन्य पुरुष की पत्नी है, और जिसका अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है उस पुरुष की सम्मति या मूक सहमति के बिना ऐसा मैथुन (Sex) करेगा जो बलात्स्ंग के अपराध की कोटि में नहीं आता, वह जारकर्म के अपराध का दोषी होगा और उसके अपराध का दंड पाँच वर्ष तक की अवधि तक बढ़ाया जा सकेगा, या अर्थदंड से या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। पर ऐसे मामले में पत्नी दुष्प्रेरक के रूप में दंडनीय नहीं होगी।

 धारा 498 विवाहित स्त्री को अपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना या निरुद्ध रखना !

  जो कोई किसी स्त्री को, जो अन्य पुरुष की पत्नी है, और जिसका अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है, उस पुरुष के पास से या किसी ऐसे व्यक्ती के पास से जो उस पुरुष की ओर से उसकी देख-रेख करता है, इस आशय से ले जायेगा या फुसलाकर ले जायेगा कि वह किसी व्यक्ती के साथ आयुक्त संभोग (Sex) करे या इस आशय से ऐसी किसी स्त्री को छिपायेगा या निरुद्ध करेगा, वह दोनों में से किसी भान्ति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकेगी या अर्थदंड से या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। 

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