*कल्कि भगवान का वास्तविक सच,जो किसी को नहीं पता !*

 


कल्कि भगवान का वास्तविक सच, जो किसी को नहीं पता!

  सम्पूर्ण भारत के हिन्दु इस अन्तिम युग में जिस भगवान के आने का बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं उसका नाम है - 'kalki bhagwan'.

  इस भगवान का नाम कलयुग पर आधारित है और इस भगवान के विपरीत भूमिका में जो नाम है, वह नाम है - 'कलिपुरूष'।

  ये दोनों इस अंतिम युग में महासंग्राम करने के लिये आयेंगे। एक को धर्मवीर योद्धा तो दूसरे को अधर्म का मुखिया माना गया है। कल्कि पुण्य का चिन्ह है तो कलि पाप का प्रतीक।

 यह सब जो होने वाला है ठीक ऐसा ही है जैसे, मानो किसी बालीबुड की फिल्म में होता है - एक हीरो है तो दूसरा विलेन। अंत में हीरो विलेन को मार देता है।

 आखिर क्या है कल्कि और कलिपुरुष का सच ? 

  बेसिक्ली कल्कि और कलिपुरुष का जो यह Concept है यह विष्णुपुराण में से लिया गया है, जो कि सनातन धर्म में शामिल की गई एक किताब है, जिसकी उपपुस्तक है- कल्कि पुराण; पर यह सम्पूर्ण सनातन धर्म का Concept नहीं !

  विष्णुपुराण भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धाभाव बढ़ाने के लिये लिखी गई थी। विष्णुपुराण के अनुसार, हर युग में भगवान विष्णु इस पृथ्वी पर आते हैं और बुराई का अंत करते हैं।

  परन्तु यह बुराई भी वेकुँठलोक से ही भगवान विष्णु के साथ उतरी है। भगवान विष्णु को शापवत इस धरा पर जन्म लेना पड़ रहा है, और जो बुराई वेकुँठ से उनके साथ उतरती है वे भी शापवत इस धरा पर बतौर बुराई या बुरे मनुष्य (असुर) के रूप में उतरती रहती है। [शाप की यह कहानी पाठक स्वयं विष्णुपुराण में से पढ़ लें अथवा टीवी सीरियल में देख लें।]

 पहले युग *सतयुग के अन्तिम पढ़ाव में बुराई उतरी और उसे कुचलने के लिये भगवान विष्णु का पहला अवतरण हुआ। परन्तु भगवान विष्णु बुराई का अंत न कर सके और बुराई और पाप की उतरोत्तर वृद्धि होती गई। पापियों की जनसंख्या बढ़ती गई।

 दूसरे युग में, जिसे त्रेतायुग कहा जाता है बुराई बढ़ती गई और राजा रावण के रूप में बुराई अपने चरम पर पहुँची। परन्तु भगवान विष्णु राजा राम के रूप में बुराई का अंत करने में असफल हुये। क्योंकि बुराई और बुरे लोग उतरोत्तर बढ़ते गये। जिसके परिणाम स्वरूप द्वापरयुग का आगमन हुआ।

 तीसरे युग में जिसे द्वापरयुग कहा जाता है भगवान के विपरीत विलेन के रूप में कोई एक दो या तीन नहीं वरन 100 लोग (कौरव), नहीं अधिक ही थे बढ़ते गये। उन पापियों का नाश करने में भी भगवान विश्नू पूरी तरह असफल सिद्ध हुये। पापियों की संख्या बढ़ती चली गई। इसी बुराई और पाप की बढौतरी के परिणामस्वरूप कलयुग का आगमन हुआ।

   कैसा होगा कल्कि अवतार ?

 अब इस चौथे युग, कलयुग में भी बुराई अनगिनत में है और भगवान केवल एक कलिपुरुष का संहार करेंगे ?


 विष्णु पुराण में धर्मी की परिभाषा यह है कि जो वैष्णव धर्म में आरूढ़ हैं केवल वही धर्मी हैं।  परन्तु जो वैष्णव धर्म से बाहर किसी और धर्म का पालन कर रहे हैं या किसी भी धर्म का पालन नहीं करते वे लोग अधर्मी हैं, चाहे वे लोग पूरी तरह से मानवता से ओत-प्रोत लोग ही क्यों न हों !

 तो इसका अर्थ यह हुआ कि भगवान कल्कि गैर-वैष्णव लोगों का ही नाश करेंगे !

 हाँ, कल्की गैर-वैष्णव लोगों का ही नाश करेंगे। इसका प्रमाण हम विष्णुपुराण की उन हर युग की कहानियों से देख सकते हैं जिसमें हर असुर या बुरा मनुष्य भगवान विष्णु के विपरीत था और उनकी भक्ति नहीं करता था, केवल उन्हीं का नाश किया गया था। तो इस युग में भी यही सब कुछ होने वाला है।

  कल्कि की तलवार से मुस्लिम, ईसाई, यहुदी, फारसी और अनगिनत संप्रदाय के लोग घात किये जायेंगे। लेकिन एक वैष्णव चाहे 'स्वर्ग के राजा इंद्र' के समान व्यभिचारी और पापी ही क्यों न हो बचा लिया जायेगा और सुरक्षित रहेगा।

 अब इस कहानी में कलिपुरुष कौन होगा ? यह नहीं पता। क्या पता वह मुस्लिम या ईसाई संप्रदाय का मुखिया हो !

 कलयुग की इस कहानी का अंत यह होगा कि तथाकथित मुसलमान, ईसाई और यहुदी जैसे बुरे लोग मार दिये जायेंगे और वैष्णव धर्मयुग की स्थापना की जायेगी।

 पर सवाल यह है कि क्या वाकेई में पाप खत्म हो जायेगा ?

 हाँ, यह तो तय है कि वैष्णव धर्म के विपरीत धर्म के अधर्मी तो खत्म हो जायेंगे पर क्या पाप खत्म हो जायेगा? 

 कहते हैं कि भगवान कल्कि अपनी तलवार से सब पापियों को मार डालेंगे। 

तो यहाँ पापी कौन हैं ? क्या विधर्मी, जिन्हें अधर्मी कहा गया?

 नहीं, पाप और धर्म की सार्वभौमिक व्याख्या के अनुसार तो 'हम सभी मनुष्य वास्तव में पापी ही हैं, किन्तु हम धर्म के लिये कोशिश करते हैं, और जब धर्म (नैतिकता में) में स्थिर हो जाते हैं तो धर्मी कहलाए जाते हैं।'

  इसलिये पाप की सार्वभौमिक परिभाषा के अनुसार तो भगवान कल्कि को सारी मानवजाति को ही अप्नी तलवार से समाप्त करना पड़ेगा, क्योंकि यहाँ कोई भी धर्मी नहीं है एक भी नहीं, जो उस कल्कि का बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं वे भी धर्मी नहीं हैं।

 तो ऐसे में भगवान कल्कि किस तरह से लोगों का उद्धार करेंगे?  किस तरह से सतयुग की स्थापना करेंगे? यह बात समझ से बाहर है !

 क्योंकि हम किसी बुरे मनुष्य को मार तो सकते हैं पर उसकी भीतर की बुराई को तो नहीं मार सकते।  किसी बुरे मनुष्य के भीतर की बुराई अथवा पाप को मारने के लिये पहले हमें स्वयं अत्यधिक कोमल बनना पड़ता है। आखिर यही एकमात्र सिद्धान्त है - 'जो शाश्वत है, अत्यधिक कठोर वस्तु को अत्यधिक कोमल वस्तु ही तोड़ डालती है।', 

 तलवार का बदला तलवार नहीं होता, बुराई का बदला बुराई नहीं होता, वरना कलयुग पैदा होता रहेगा होता रहेगा।

 बल्कि इस तरीके से हम एक और गलत असभ्य सभ्यता की नींव डालेंगे, एक और गलत और बुरे युग की नींव रखेंगे!

 अगर कल्कि पापों से मुक्तिदाता होते तो वह इस तरीके से तो नहीं आते।  आखिरकर वह तो स्वयं मुक्त नहीं हैं, क्योंकि वह स्वयं शापग्रस्त हैं और हर युग में अपनी खुद की मुक्ति का बंदोबस्त नहीं कर पाते, तो पूरी मानवता को क्या बंधनमुक्त कर पायेंगे !

 हम भारतीय हिंदुओं की सबसे बड़ी मूर्खता यह है कि हम तथ्यों को नहीं स्वीकारते- *कल्कि अवतार किसका वध करने के लिए होगा ?,और न ही अपने विवेक को सत्य के लिये जागृत ही करते हैं। बस, जो लिख दिया गया है यही भगवान की महिमा है जानकर पूरी तस्स्ल्ली के साथ किसी बुझे हुये दीपक की तरह बैठे रहते हैं।

 हम यह भी नहीं सोचते कि सतयुग के अन्त में युद्ध हुआ, हजारों के हिसाब से लोग मरे, पर पाप बढ़ा फिर त्रेता युग आया।

 त्रेतायुग के अन्त में भी युद्ध हुआ, लाखों के हिसाब से लोग मरे, पर पाप बढ़ा फिर द्वापरयुग आया।

 द्वापरयुग के अंत में भी युद्ध हुआ, करोड़ोंके हिसाब से लोग मरे, पर पाप बढ़ा फिर कलयुग आया।

 अब कलयुग के अन्त में भी युद्ध होगा और फिर पाप बढ़ेगा तथा एक नये पापी युग की शुरुवात होगी जो पहले के चारों युगों से पाप में अधिक बलवान होगा।

  *कल्कि अवतार क्या है ?

 अत: यह जो कल्कि का Concept है, यह Concept *The worship of heroism* का है, न कि *Worship of God* का है। क्योंकि अगर God (परमेश्वर) को बुरे लोगों को खत्म करना ही होता, तो वह पलक झपकते ही प्राकृतिक आपदाओं के द्वारा संपूर्ण मानवता का सत्यानाश कर डालते।

 मगर नहीं, क्योंकि परमेश्वर बुरे लोगों से नहीं वरन मनुष्य के हृदय के भीतर के पाप से घृणा करते हैं और वह अपने कोमल तरीके से उन पापियों के हृदयों के भीतर के पापों का सत्यानाश करते हैं !

 यह जो Worship of heroism (कल्कि अवतार) है, यह स्वर्गदूत अर्थात kalki bhagwan के द्वारा सही के पक्ष में प्रत्यक्ष लड़ाई मात्र है, और कुछ नहीं !

 

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