चीन का पहला सम्राट: किन शी हुआंग की हैरतअंगेज कहानी!

 

किन शी हुआंग की हैरतअंगेज कहानी !


चीन का पहला सम्राट: किन शी हुआंग की हैरतअंगेज कहानी!

 Terracotta Army: "दोस्तों, क्या आप एक ऐसे राजा के बारे में जानते हैं जिसने मरने के बाद भी अपनी रक्षा के लिए 8,000 सैनिकों की एक पूरी फौज ज़मीन के नीचे बनवा दी थी? एक ऐसा शख्स जिसने 7 अलग-अलग टुकड़ों में बँटे चीन को एक कर दिया, लेकिन वही शख्स मौत से इतना डरता था कि उसने 'अमर होने का अमृत' ढूँढने के लिए हज़ारों लोगों को काम पर लगा दिया। आज हम बात करेंगे चीन के पहले और सबसे शक्तिशाली सम्राट— किन शी हुआंग (Qin Shi Huang) की।"



 

किन शी हुआंग की सत्ता तक पहुँच!

यह कहानी शुरू होती है आज से लगभग 2200 साल पहले। उस वक्त चीन कई छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था जो आपस में हमेशा लड़ते रहते थे। इस दौर को 'वारिंग स्टेट्स पीरियड' (Warring States Period) कहा जाता था। किन शी हुआंग सिर्फ 13 साल की उम्र में राजा बने। उनका असली नाम 'यिंग झेंग' था। उन्होंने महज 9 साल के अंदर एक-एक करके सभी दुश्मन राज्यों को हरा दिया और 221 ईसा पूर्व (BC) में पूरे चीन पर कब्ज़ा कर लिया। उन्होंने खुद को 'शी हुआंगडी' का खिताब दिया, जिसका मतलब था— प्रथम सम्राट


किन शी हुआंग की हैरतअंगेज कहानी !





 किन शी हुआंग की महान उपलब्धियां: बदलाव का दौर!

सम्राट किन सिर्फ एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक विजनरी (Visionary) भी थे। उन्होंने पूरे देश में एक ही तरह के सिक्के और एक ही तरह के नाप-तौल की प्रणाली लागू की। सबसे बड़ी बात, उन्होंने पूरे चीन में लिखने का एक ही तरीका (Script) शुरू किया, जिसने लोगों को एक सूत्र में बाँध दिया। और हाँ, उत्तर से आने वाले दुश्मनों से बचने के लिए उन्होंने कई पुरानी दीवारों को जोड़कर 'द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना' की नींव रखी।


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किन शी हुआंग का अंधेरा पक्ष: एक बेरहम राजा?

लेकिन हर महान कहानी की एक काली सच्चाई भी होती है। किन शी हुआंग काफी सख्त और बेरहम भी माने जाते थे। कहा जाता है कि उन्होंने हज़ारों किताबों को जलवा दिया और उन विद्वानों को ज़िंदा दफ़ना दिया जो उनके खिलाफ बोलते थे। उनका मानना था कि पुरानी सोच नए साम्राज्य के लिए खतरा है। ग्रेट वॉल बनाने में भी लाखों मज़दूरों की जान गई, इसीलिए इसे 'दुनिया का सबसे लंबा कब्रिस्तान' भी कहा जाता है।


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किन शी हुआंग के अमर होने का जुनून और Terracotta Army!

अपने आखिरी दिनों में, किन शी हुआंग मौत से इतने डर गए कि उन्होंने 'अमर होने की दवा' ढूँढने का जुनून पाल लिया। इसी तलाश में उन्होंने 'मर्करी' (पारा) की गोलियाँ खानी शुरू कर दीं, जो उनके लिए ज़हर बन गईं। मरने से पहले उन्होंने अपने लिए एक विशाल मकबरा बनवाया, जिसे आज हम टेराकोटा आर्मी के नाम से जानते हैं। ये असली आकार के मिट्टी के सैनिक हैं, हर एक का चेहरा दूसरे से अलग है, जो उनकी कब्र की रक्षा के लिए बनाए गए थे।

 निष्कर्ष

किन शी हुआंग सिर्फ 49 साल जिए, लेकिन उन्होंने जो चीन बनाया, वो आज भी दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक है। क्या उन्हें एक महान नेता कहना चाहिए या एक बेरहम तानाशाह? हमें कमेंट्स में ज़रूर बताएं। अगर आर्टिकल पसंद आया तो 'Knowledge on top' को फॉलो करना ना भूलें!

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